Saturday, August 16, 2014

मदरसा और इश्लाम का सच: सामूहिक दुष्कर्म और धर्मातरण !

देश में एक बार फिर से इश्लामिक जेहाद का सच निकल कर सामने आया है। हर बार की तरह शासन और प्रसाशन पुरे मामले पर पर्दा डालने का प्रयास कर रहा है। उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म और धर्मातरण का मसला सड़क से लेकर संसद तक में गूंजा। सपा, बसपा, कांग्रेस, टीएमसी, सबने आपने-अपने तरीके से इस मामले पर रोटी सेकते नज़र आये। मगर किसी ने पीड़िता के ज़िंदगी और उसके परिवार की आपबीती को टटोलने का प्रयास नहीं किया। यही कारण है की हम घटना की हकीकतों से पर्दा उठाने के लिए ये ब्लॉग लिख रहे हैं, ताकि समाज और देश सच जान सके। 27 जुलाई को मेरठ के खरखौंदा थाना क्षेत्र से एक हिन्दू लड़की का अपहरण हुआ, लेकिन पुलिस ने इस रिपोर्ट दर्ज नहीं की। 29 जुलाई को स्थानीय जन प्रतिनिधियों के दबाव में रिपोर्ट तो लिख ली गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। तीन अगस्त को लड़की किसी तरह उनके चंगुल से निकलकर भाग आई। लौटकर आई लड़की ने जो कुछ बताया, वह सिर्फ खौफनाक ही बल्कि दिल दहला देने वाली है। लड़की का अपहरण करके पास के एक गांव के प्रधान ने पांच दिन तक अपने घर में रखा। प्रधान की पत्नी और एक मदरसे के हाफिज की मदद से उसके साथ कई दिनों तक सामूहिक दुष्कर्म किया गया। लड़की के मुताबिक उसके जैसी 40-50 और लड़कियां वहां पर हैं। 

ये पूरा मामला लड़कियों के ट्रैफिकिंग लग रहा है। मगर उत्तर प्रदेश सरकार एक विशेष वर्ग को संतुष्ट करने के लिए उससे जुड़े अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने में अब भी संकोच कर रही है। मदरसे में युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म और धर्म परिवर्तन का मामला पूरे देश में गूंजा। खरखौदा क्षेत्र के युवती के गांव में भी भाजपा नेताओं और हिन्दू संगठन के लोगों का जमावड़ा रहा। युवती को अदालत में पेश किया गया । साथ ही गढ़मुक्तेश्वर के मदरसे में छापा मारकर धर्म परिवर्तन कराने वाले गुल सनव्वर समेत दो को गिरफ्तार भी किया गया। पीड़ित परिवार के लोगों में अभी भी पुलिस की धीमी कार्रवाई को लेकर रोष है। सबसे चौकाने वाली बात यहां ये है के सामूहिक दुष्कर्म के बाद लड़की की हालत बिगड़ी तो मुजफ्फरनगर के एक नर्सिग होम में ऑपरेशन कर गर्भाशय की ट्यूब निकलवा दी गई। युवती के साथ हुई घिनौनी वारदात के बाद गांवों में बवाल मचता रहा मगर पुलिस पुरे मामले पर पर्दा डालने का प्रयास करती रही। मदरसों के अंदर दूसरी युवतियों को भी बंधक बनाकर विदेश भेजने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने कड़ी सुरक्षा में युवती के अदालत में एक घंटे के बयान दर्ज कराए। मामले में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी को जेल तो भेज दिया है, मगर है सवाल अब भी बरकरार है की क्या आज मदरसा धर्मांतरण का अड्डा बन गया है?


दुष्कर्म पीड़िता को मदरसे में गाय का मांस खिलाने की कोशिश  

युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म और धर्म परिवर्तन के प्रकरण में पुलिस ने पीड़िता को अदालत में पेश किया। पीड़िता ने एक घंटे में एक माह की आपबीती को बयां किया किया। पीड़िता ने जो बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराया उसे सुन किसी का कलेजा कांप उठेगा। पीड़िता ने बताया कि तीन साल पहले वह इंटरमीडिएट में पढ़ रही थी, तभी पड़ोस में रहने वाले हसमत की बेटी निशात ने मुझसे दोस्ती की। निशात मेरे साथ बीए फाइनल तक साथ पढ़ी। उसने तभी से इस्लाम धर्म के बारे में बताना शुरू कर दिया था, जब मैं नौकरी तलाश रही थी। तभी निशात ने मेरी मदद की और मदरसे में 1500 रुपये प्रति माह में की नौकरी दिलाई। मदरसे में अंग्रेजी और हिंदी पढ़ाने लगी थी। इसी बीच 29 जून को गांव के सनाउल्ला अपनी बीवी समरजहां के साथ मिलकर ग्राम प्रधान नवाब की मद्द से बुर्का पहना कर बाइक से उठा ले गए। पहले हापुड़ के मदरसे में रखा गया। इसके बाद गढ़ के दतोई स्थित मदरसे में ले जाकर नशे देकर चार लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म किया। इसके बाद मदरसे में रखकर बहला फुसलाकर धर्म परिवर्तन करा दिया। बाकायदा जो शपथ पत्र तैयार किया, उस पर जन्नत बुशरा नाम से हस्ताक्षर भी उन्होंने खुद ही कर दिए। उसके बाद घर लौट गई। 8 जुलाई को हालत बिगड़ने पर सनाउल्ला को मामले की जानकारी दी गई। सनाउल्ला 23 जुलाई को वहां से पहले मेरठ ले गया, जहां एक अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराया गया, जिसमें गर्भाशय की फेलोपियन ट्यूब में गर्भ धारण होने के कारण मुजफ्फरनगर ले गए। वहां ऑपरेशन कराने के बाद मुस्तफा कालोनी स्थित एक मदरसे में रखा गया। वहां से बाहर भेजने की तैयारी चल रही थी। पता चला की उससे पहले भी कुछ युवतियों को बाहर भेजा जा चुका है। इसी के डर से घबरा गई और वहां भाग आई। बाहर आकर इमरान नामक युवक ने सहायता देकर बस स्टैंड तक पहुंचा दिया, जहां से बस में सवार होकर मेरठ के भैसाली बस स्टैंड पहुंची और परिजनों को मामले की जानकारी दी। पीड़िता ने बताया कि, मदरसे में धर्म परिवर्तन से पहले मौलाना सिद्दीकी की लिखी हुई आपकी अमानत आपकी सेवा मेंकिताब को पढ़ाया गया, जिसमें लिखा था कि, इस्लाम धर्म में ही असली जन्नत है। बताया गया कि ईद के मौके पर धर्म कबूलना जन्नत में जाना होता है। इस्लाम धर्म कबूल नहीं करने पर भाई की हत्या करने की धमकी भी दी गई थी।

परदा डालने में जुटे शीर्ष अफसर

युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म और धर्म परिवर्तन के साथ गर्भाशय से फेलोपियन ट्यूब निकालने के सनसनीखेज मामले में प्रदेश सरकार के घिर जाने पर अफसर पर्देदारी की कोशिश में जुट गए। पुलिस महानिरीक्षक कानून-व्यवस्था अमरेंद्र कुमार सेंगर ने बेतुका बयान देकर सब को चौंका दिया । उनका कहना है कि पीड़िता के मेडिकल में दुष्कर्म का उल्लेख नहीं है, जबकि डीआइजी के. सत्यनारायण ने कैमरे के सामने सामूहिक दुष्कर्म और गर्भाशय से फेलोपियन ट्यूब निकालने की पुष्टि की। बाकायदा धर्म परिवर्तन कराने की बात भी स्वीकार की है। रिपोर्ट के आलावा पीड़िता ने अदालत में दिए अपने 164 के बयान में भी सामूहिक दुष्कर्म और धर्म परिवर्तन का जिक्र किया है। लेकिन लखनऊ में बैठकर पुलिस महानिरीक्षक कानून व्यवस्था का कहना है कि, युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ ही नहीं। तो सवाल खड़ा होता है की क्या ये बेशर्म अधिकारी मुलायम यादव के प्रवक्ता बन गए हैं?   जब लड़की की पेट पर आपरेशन के निशान की याद दिलाई गयी तो पुलिस अधिकारी ने कहा कि यह नितांत व्यक्तिगत है और इस पर टिप्पणी उचित नहीं है। तो ऐसे में सवाल खड़ा होता है की क्या ये पुलिस अधिकारी अपने न्याय धर्म को भूल गए हैं जिसे वह हर हाल में निभाने का सपथ लेते हैं ।  

अदालत से 164 के तहद सीआरपीसी में बयान दर्ज कराने के बाद कड़ी सुरक्षा में पीड़िता को लेकर पुलिस गांव जा रही थी। तभी गांव के बाहरी छोर पर कमिश्नर ने रोक कर पीड़िता से करीब दस मिनट तक वार्ता की। पीड़िता के मुताबिक, उससे अदालत में दिए गए बयान के बारे में पूछा गया। तीन दिन बाद पीड़िता को अदालत में पेश करने के बाद करीब एक घंटे तक बयान दर्ज हुए। उसके बाद पीड़िता को पीछे के रास्ते से निकालकर पुलिस की टीम खरखौदा के गांव में ले गई। गांव के बाहर पहले से ही कमिश्नर, डीआइजी और एसपी देहात मौजूद थे। कमिश्नर ने युवती को गांव के बाहरी छोर पर रोक लिया। महिला एसओ समेत सभी को अलग करने के बाद पीड़िता का मुंह खुलवाया गया। इसके बाद उससे करीब दस मिनट तक वार्ता की गई। उस समय परिवार के सदस्यों को भी दूर कर दिया था। जबकि कानूनन महिला से महिला अफसर को ही पूछताछ करनी चाहिए। ऐसे में कमिश्नर की पूछताछ पर लोगों में गुस्सा भड़क गया। पीड़िता ने बताया कि, कमिश्नर भूपेंद्र सिंह ने अदालत में दिए गए बयानों के बारे में जानकारी मांगी थी।
 
खरखौदा क्षेत्र से युवती का अपहरण कर धर्म परिवर्तन कराकर सामूहिक दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने गढ़ के गांव दौताई में स्थित एक मदरसे से गुल सनव्वर व फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वाले कंप्यूटर सेंटर के संचालक राजा को गिरफ्तार किया है। युवती के धर्म परिवर्तन को लेकर पुलिस के हाथ लगे शपथ पत्र के आधार पर  मेरठ पुलिस की टीम ने गढ़ तहसील के सामने स्थित रजत कंप्यूटर सेंटर संचालक के स्वामी राजा को गिरफ्तार कर लिया। जबकि उसके बाद पुलिस ने धर्म परिवर्तन कराने वाले दौताई निवासी गुल सनव्वर को भी मदरसे से गिरफ्तार कर लिया। सूत्रों के अनुसार गुल सनव्वर ने स्वीकार कर लिया है कि तीस जुलाई को पीड़ित युवती, चार अन्य लोगों के साथ कार में सवार होकर मदरसे में आयी थी।

धर्म परिवर्तन के समय बेहोश थी युवती

पुलिस गिरफ्त में आए आरोपी के अनुसार तीस जुलाई की दोपहर को दौताई के मदरसे में जब युवती पहुंची तो उसे ठीक से होश भी नहीं था। उसे दो युवक गोद में उठाकर अन्दर ले गये थे। उसके बाद वे वहां से चले गये थे। सौ रुपये के शपथ पत्र के फर्जी प्रमाणपत्र बनाने वाले कम्प्यूटर संचालक युवक राजा ने बताया कि उसके साथ चार युवक व मदरसा संचालक गुल सनव्वर आया था। उस समय दुकान पर काफी भीड़ थी। उसने उनसे कुछ देर बाद आने को कहा तो वे लगभग एक घंटे बाद दोबारा उसकी दुकान पर पहुंचे तो उसने एक हजार रुपये लेकर उनका शपथ पत्र बना दिया। कंप्यूटर सेंटर का संचालक भी गिरफ्तार किया गया है।

नफा नुकसान की सुरंगों से पहुंचती रही सियासत

खरखौदा प्रकरण से राष्ट्रीय स्तर पर मचे भूचाल के बीच सियासत भी नफा नुकसान का चोला ओढ़कर पहुंची। पीड़िता के घर दिनभर सियासी दलों की गहमागहमी बनी रही। गांव की पगडंडियों पर वाहन मोड़ने से पहले सियासी समीकरणों का पूरा ख्याल किया गया। दर्द और अनहोनी की आशंका में डूबा परिवार दिनभर लोगों के प्रश्नों से छलनी होता रहा। प्रशासन भी सियासी बंधन से जकड़ा नजर आया, जबकि घटना के राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित होने के बावजूद सूबे का कोई भी जिम्मेदार नुमाइंदा पीड़िता का दर्द बांटने नहीं पहुंचा। एक भी लालबत्ती गांव में नजर नहीं आई। तीन दिन पहले जब लड़की ने घटनाक्रम से पर्दा उठाया तो यकीनन सुनने वालों के रोंगटे खड़े हो गए।

युवती को खाड़ी देशों में सप्लाई करने की थी तैयारी

पूरे मामले में मानव तस्करी का मामला साफ दिख रहा है। युवती का भी कहना है कि उसे विदेश भेजने की तैयारी की जा रही थी। युवती के अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे रिपोर्ट में गर्भाशय से फेलोपियन ट्यूब गायब होने से मानव तस्करी की आशंका पैदा कर दी है। माना जा रहा है कि फेलोपियन ट्यूब निकालकर युवती को खाड़ी देशों में सप्लाई करने की तैयारी थी। यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी बिहार, उड़ीसा और झारखंड की युवतियों की यहां तस्करी के मामले सामने आ चुके हैं। डाक्टरों की मानें तो युवती के अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे में गर्भाशय को जोड़ने वाली दो फेलोपियन ट्यूब में से एक गायब है। यह ट्यूब उस स्थिति में निकाली जाती है तो ऐसे में सवाल खड़ा की क्या आज देश में मदरसा सामूहिक दुष्कर्म और धर्मातरण का  अड्डा बन गया है?

जुवेनाइल जस्टिस एक्ट बनाम किशोर अपराध !

हत्या के मामले में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट में उतने अधिक संशोधन की आवश्यकता नहीं है जितनी बलात्कार, सामूहिक बलात्कार और उसके पश्चात् हत्या करने के मामलों में| तेरह वर्ष की उम्र पूरी करते करते कोई भी किशोर ऐसी शारीरिक और मानसिक स्थिति में होता है कि सही-गलत, नैतिक-अनैतिक इत्यादि बातें अच्छी तरह से समझने लगता है यही कारण है कि उसे जुवेनाइल जस्टिस एक्ट में छिपा अपना हित और उसके द्वारा किया गया अपराध दोनों अच्छी तरह से पता होता है| हत्या जैसे मामले में किशोरावस्था का तूफानी मानसिक संवेग भी विचारणीय है लेकिन तब जबकि हत्या अचानक उत्पन्न हुए किसी मनोभाव के कारण की गई हो| परन्तु बलात्कार कभी भी अचानक उत्पन्न हुए किसी मनोभाव का कारण नहीं होता, ये एक ऐसी प्रताड़ना है जिसे बिना सोचे समझे, और बिना वयस्क शारीरिक और मानसिक स्थिति के किया ही नहीं जा सकता इसलिए इन मामलों में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट का लाभ देकर आज तक न जाने कितनी लडकियों/महिलाओं को नारकीय कष्ट, जिल्लत की जिंदगी और क्षोभ से भरी मृत्यु भुगतने पर विवश किया है| आज एक मौका शासन और न्याय व्यवस्था को भी मिला है कि वे लम्बे समय से एक विवेकहीन और लैंगिक पक्षपात वाले कानून की आड़ में अपने द्वारा किये गए अन्याय का पश्चाताप करें और एक ऐसा सख्त कानून बनायें जिससे प्राकृतिक और सामाजिक न्याय की पुनर्स्थापना हो, एक बार फिर से न्याय और संसदीय व्यवस्था में लोगों की आस्था बलवती हो|

जुवेनाइल कानून एक अच्छी सोच की उत्पत्ति था लेकिन वो कानून तब बनाया गया था जब भारत जैसे देश पर न तो पाश्चात्य संस्कृति हावी थी और न ही मीडिया की नंगई| इसे लाने के पीछे एक मात्र कारण था उस समय सबसे बुरे किस्म के लोगों में भी अपने बच्चों को अच्छा बनाने की ललक जिससे लगभग 18 वर्ष की उम्र तक के लड़कों को शातिर अपराधी मस्तिष्क मिल पाना दुर्लभ संयोग या कुसंगति ही हो सकती थी| उस समय न तो समाचार के नाम पर स्त्री देह का व्यापार होता था और न ही मूवी इत्यादि में फूहड़ता की गुंजायश थी| ऐसे में किशोरों के द्वारा जो दुर्लभ अपराध होते थे वे सिर्फ इसलिए कि या तो उनके किसी सगे सम्बन्धी के साथ कोई अत्याचार होता था या फिर किसी प्रौढ़ व्यक्ति का सोचा समझा माइंड-वाश, और परिणाम अधिकतर हत्या और हत्या की कोशिश जैसे अपराध ही थे| लैंगिक अपराध तो गिनती की भी नहीं थे| प्रशंसा करनी होगी उन लोगों की जिन्होंने समय रहते उन किशोरों को एक अच्छा कानून देकर समाज में उनकी सार्थक वापसी का रास्ता खोला और साथ ही उन अपराधियों के विरुद्ध भावनात्मक सुरक्षा भी जो किशोरों को या उनके संबंधियों को लाचार मानकर अत्याचार करते थे|

परन्तु वर्तमान परिवेश में वह सुरक्षा छूट जो किशोरों को मिली थी, अब महिलाओं को चाहिए, क्योंकि अब भारतीय समझ संस्कृति-विहीन समाज के रूप में स्त्रियों के लिए चुनौती बना खड़ा है| एक ओर उन्हें बाजार का प्रोडक्ट बना कर खड़ा कर दिया गया है जिसमे उन्हें स्वयं अपने जिस्म की नुमाइश करके पैसा कमाना सबसे आसान लगता है तो दूसरी तरफ उस प्रोडक्ट का साइड इफ़ेक्ट समाज के हर तबके की महिलाओं को फब्तियों से लेकर सामूहिक बलात्कार तक झेलकर चुकाना है| हलाकि इसमें स्त्री स्वयं से कहीं भी किसी भी स्तर पर जरा सी भी जिम्मेदार नहीं है, ये पूरा खेल उन कुत्सित राजनीतिज्ञों, मीडिया, फिल्मकारों, छद्म दार्शनिको, समाज-शास्त्रियों और सफेदपोशों का है जो हर स्तर पर हर जगह पर स्त्री को सिर्फ और सिर्फ एक बाजारू प्रोडक्ट के रूप में देखते हैं और उसे आधुनिकता के या स्त्री सशक्तिकरण के लिफ़ाफ़े में लपेटकर इस तरह पेश करते हैं जैसे इससे बढ़कर स्त्री हित कोई दूसरा नहीं हो सकता|

स्पष्ट है कि हर एक रीति, रिवाज, कानून, सिद्धांत चाहे जितना भी अच्छा क्यों न हो एक नियत समय तक ही रहना चाहिए अन्यथा वह पूरी दुनिया को भ्रष्ट कर देगा| आज हमारे देश में जुवेनाइल क़ानून एक वाईल (सड़े हुए) कानून से ज्यादा कुछ नहीं है| इसका कारण भी स्पष्ट है कि समाजशास्त्रियों की अवधारणा (कि बालक की अवस्थाएं सिर्फ पांच होती होती हैं- शैशवावस्था, बाल्यावस्था, किशोरावस्था, प्रौढ़ावस्था, और वृद्धावस्था) नवीन परिवेश में सही नही है| यदि आज हम विकास के इस प्रक्रम का सही-सही अवलोकन करें तो किशोरावस्था (जिसके कारण जुवेनाइल कानून का उद्भव हुआ) अब दो भागों में बंट चुकी है जिसे आप किशोरावस्था व् छिछोरावस्था (जैसा कि जीव-विज्ञान के मेरे एक शिक्षक मित्र ने इस अवस्था का नामांकन किया है) के रूप में परिभाषित कर सकते हैं| इस अवस्था का जिक्र भले ही कुछ लोगों को अटपटा लगे लेकिन यही आज हमारे भारतीय समाज और पूरी स्त्री जाति के लिए चुनौती बन गई है| कानून का काम सिर्फ घिसे-पिटे कानून को लागू करना नहीं साथ ही साथ उनकी सार्थकता और प्रभाव का आंकलन करना भी होना चाहिए वर्ना हम बातें चाहे जितनी करें न्याय कभी नही दे पाएंगे|