Friday, January 11, 2013

क्या पाकिस्तान को माकूल जवाब देने का वक्त आगया है ?

क्या पाकिस्तान कभी भारत का मुकाबला कर सकता था। हकीकत तो ये है कि पाकिस्तान में कभी भारत के खिलाफ जंग छेड़ने की ताकत ही नहीं थी। इसलिए तो वो कश्मीर में आतंकियों के घुसपैठ का तरीका अपनाता है। क्या है हमारी ताकत और कितना कमजोर है हमसे पाकिस्तान। जब भी भारत की सैन्य ताकत की बात होती है तो मुकाबला चीन से ही होता है न कि पाकिस्तान से। फिर भीपाकिस्तान हमेशा से खुद की तुलना भारत से करता आया है। अपने इन दोनों पड़ोसियों से हमारे रिश्तों की हकीकत हर कोई जानता है और दोनों दुश्मनों के आपसी रिश्तों को भी जानता है। थल सेना की बात करें तो भारत के पास 13 लाख सैनिक हैं जबकि पाकिस्तान के पास 10 लाख थल सैनिक हैं। भारतीय वायुसेना के बेड़े में दुनिया की सबसे बेहतरीन जहाज मौजूद हैं। भारत के पास करीब 1000 लड़ाकू विमान हैं। जिनमें सुखोई, मिराज, मिग-29, मिग-27, मिग-21 और जगुआर शामिल हैं। पाकिस्तान के पास सिर्फ 500 लड़ाकू विमान हैं। जिनमें चीनी एफ-7, अमेरिकी एफ-16 और मिराज शामिल है। मिसाइलों की बात करें तो भारतीय सेना के बेड़े में सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस, अग्नि, पृथ्वी, आकाश और नाग जैसे मिसाइल हैं। पाकिस्तान की बात करें तो उसके पास गौरी, शाहीन, गजनवी, हत्फ और बाबर जैसे मिसाइलें हैं। ब्रह्मोस की तकनीक सबसे आधुनिक है और इसे 5 मिनट में दागने के लिए तैयार किया जा सकता है। वहीं भारत के पास 27 युद्धपोत हैं, जबकि पाकिस्तान के पास सिर्फ 11 युद्धपोत हैं। वहीं परमाणु हथियारों की बात करें तो भारत के पास 50 से 90 परमाणु हथियार हैं।

पाक सेना के पास 50 से ज्यादा परमाणु हथियार हैं। इधर भारतीय सरकार बलात्कारियों से निपटने में, बलात्कार और महिला हिंसा के विरोध में सड़कों पर उतरने वालों को सबक सिखाने में, तमाम सारे लोगों की बयानबाजियों पर तर्क-कुतर्क करने में, अपने भ्रष्ट से भ्रष्टतम मंत्रियों, सांसदों, विधायकों को बचाने में, क्रिकेट के द्वारा रिश्तों की कटुता को समाप्त करने में लगी हुई है। ऐसा लग रहा है जैसे उसके पास देश की, समाज की, नागरिकों की कोई चिन्ता नहीं..इसी के साथ ऐसा भी लगा कि सरकार को देश की सुरक्षा की भी चिन्ता नहीं। यह इस कारण समझ में आ रहा है कि वह देश के अन्दर के दहशतगर्दों से तो निपटने में घनघोर रूप से नाकाम रही है इसके साथ ही वह अपने चिरपरिचित दुश्मन पड़ोसी की चालों से निपटने में भी नाकाम रही है। पाकिस्तान ने अपनी औकात दिखाते हुए सीमा पर हमला किया और अपनी कमीनी हरकत दिखा दी। लगातार मिलते समाचारों से ज्ञात हुआ कि पाकिस्तानी सेना ने न सिर्फ हमला किया, न सिर्फ हमारे जवानों को मारा बल्कि निहायत घटिया हरकत दिखाते हुए एक जवान का सिर काटकर ले गये। ऐसी घिनौनी हरकत की अपेक्षा पाकिस्तानी सेना से ही की जा सकती है। यह इस कारण से और भी क्षोभकारी है कि एक ओर हमारी सरकार बात-बात पर पाकिस्तान के प्रति अपना प्रेम दर्शाने में नहीं चूकती हैय भारत का दाना-पानी खाते तथाकथित बुद्धिजीवी जो पाकिस्तान से दोस्ती बनाये रखने के लिए आये दिन मोमबत्तियां जलाकर खड़े हो जाते हैंय हमारे तमाम सारे कथित धर्मनिरपेक्ष राजनेता तुष्टिकरण के चलते सोते-जागते पाकिस्तान-पाकिस्तान का राग अलापते रहते हैं और वहीं दूसरी ओर अपनी जात-औकात से, अपने जन्म से ही हरामखोरी दिखाने वाला पाकिस्तान खुलेआम हम पर हमला करने से नहीं चूकता है।

अभी कुछ दिनों पूर्व ही उनके आला मंत्री ने आकर अपनी बदजुबानी दिखाई और उसका प्रत्युत्तर देने के बजाय हमारी सरकार चूडि़यां पहन कर बैठी रही। उनकी इस सरकारी बदजुबानी और हमारी सरकारी नपुंसकता का ही दुष्परिणाम यह रहा कि पाकिस्तानी सैनिकों ने मौका ताक कर हमारे सैनिकों के साथ ऐसा दुर्व्यवहार कर दिया। यह बात हमारे पूरे देश को, पाकिस्तान-प्रेम दर्शाते लोगों को और समूचे पाकिस्तान को भी बहुत अच्छी तरह से पता है कि हमारी सेना ने एक बार अपनी ताकत का एक बहुत छोटा सा प्रदर्शन कर दिया तो पाकिस्तान का नामोनिशान मिट जायेगा। इतना मालूम होने के बाद भी पाकिस्तान की ओर से, हमारी सरकार की ओर से, तथाकथित पाकिस्तान-प्रेम दर्शाते भारतीयों की ओर से भाईचारे की, दोस्ती की, रिश्तों को सुधारने की नौटंकी होती रहती है। अभी-अभी ही हमारे देश ने रिश्तों को सुधारने के लिए उनके साथ ‘सुर-संग्राम’ सरीखा गायकी का राग आलापा थाय हमारे और उनके रुपया पसंद क्रिकेट खिलाडि़यों ने क्रिकेट खेलकर औपचारिकता का निर्वाह किया था, अब वे सब जाकर अपनी उस दोगले व्यवहार वाली पाकिस्तानी सरकार को, चिरकुट हरकतें करके हमारे सैनिकों को मौत बांटने वाली पाकिस्तानी सेना को दोस्ती, रिश्ते, भाईचारे की सही-सही परिभाषा समझायें।

अब कम से कम इस देश के लोगों को जागरूक होना होगा, अति-जागरूक होना होगा और सरकार की, तथाकथित पाकिस्तान पसंद बुद्धिजीवियों की, मुस्लिम तुष्टिकरण वाले राजनेताओं की उन तमाम हरकतों का विरोध करना होगा जो सिर्फ और सिर्फ अपनी-अपनी रोटियां सेंकने के लिए पाकिस्तान के साथ सम्बन्ध मधुर बनाये रखने की वकालत करते रहते हैं। यदि हम ऐसा नहीं कर पाये तो आये दिन हमें पाकिस्तान की ओर कभी संसद पर, कभी किसी शहर पर तो कभी सीमा पर ऐसे हमलों को सहना पड़ेगा और हमारे अनेक परिवारों को आंसू बहाना होगा। अभी भी शायद बातचीत से कोई रास्ता निकल जाए इसी आशा में भारत लगा हुआ है। पाकिस्तान द्वारा किए गए इतने बर्बर व्यवहार के बाद भी उससे यह आस लगा बैठना कि वो बात कर मामले को सुधार लेगा क्या यह उम्मीद बेकार नहीं लगती है? जिस प्रकार से पाकिस्तान बार-बार अपने किए किए गए वायदे से पीछे हट रहा है उसको देख कर यह मानना बहुत मुश्किल है कि शांति बनाए रखने के मामले में वह भारत का साथ देगा। अपनी आदत से मजबूर पाकिस्तान शांति के क्षेत्र में कोई कार्यवाही करना ही नहीं चाहता है। कुछ दिन पहले हुई घटना के बाद भी इस तरह की आशा रखना बेकार ही सबित होगा। इस तरह की घटनाएं जो बार-बार हो रही हैं क्या उन पर उतना ध्यान न देकर कोई देश की राजनीति और यहां के राजनेता पर विश्वास कर सकता है? यहां के लोगों की यह अवस्था है जो कुछ कर नहीं सकते हैं और किसी ना किसी रूप में अपने बच्चों को गोली का शिकार होते देखते रहते हैं. अपनी आंखों के सामने इन बर्बादियों का मंजर किसको अच्छा लगता होगा? अपने ओज का परित्याग कर चुके भारतीय राजनीति से क्या यह उम्मीद की जा सकती है कि वो आने वाले समय में देशवासियों की रक्षा आतंकवाद से कर सकेगी? संवेदनहीनता को कैसे और कब तक बर्दाश्त करना होगा इसका कोई लेखा-जोखा नहीं है और ना ही कोई कभी इस सियासत से यह उम्मीद कर सकता है। ऐसे में कह सकते है की पाकिस्तान को माकूल जवाब देने का वक्त आ गया है।

Thursday, January 10, 2013

ओवैसी का साम्राज्य और साम्प्रदायिकता की बोल से सत्ता का सफ़र

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन लगभग 80 वर्ष पुराना संगठन है जिसकी शुरुआत एक धार्मिक और सामाजिक संस्था के रूप में हुई थी लेकिन बाद में वो एक ऐसी राजनैतिक शक्ति बन गई जिस का नाम हैदराबाद के इतिहास का एक अटूट हिस्सा बन गया है। गत पांच दशकों में मजलिस और उसे चलने वाले ओवैसी परिवार की शक्ति रफ्ता रफ्ता इतनी बड़ी है कि हैदराबाद पर पूरी तरह उसी का नियंत्रण है. विधान सभा में उस के सदस्यों की संख्या बढ़ कर 7 हो गई है, विधान परिषद में उस के दो सदस्य हैं. हैदराबाद लोक सभा की सीट पर 1984 से उसी का कब्जा है और इस समय हैदराबाद के मेयर भी इसी पार्टी के है। मजलिस को आम तौर पर मुस्लिम राजनैतिक संगठन या मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधि के रूप में देखा जाता है और है दराबाद के मुसलमान बड़ी हद तक इसी पार्टी का समर्थन करते रहे हैं हालांकि खुद समुदाय के अन्दर से समय समय पर उस के विरुद्ध आवाजें भी उठती रही है। जहाँ तक ओवैसी परिवार का सवाल है उस के हाथ में पार्टी की बागडोर उस समय आई जब 1957 में इस संगठन पर से प्रतिबंध हटाया गया। मजलिस के इतिहास को दो हिस्सों में बांटा जा सकता है। 1928 में नवाब महमूद नवाब खान के हाथों स्थापना से लेकर 1948 तक जबकि यह संगठन हैदराबाद को एक अलग मुस्लिम राज्य बनाए रखने की वकालत करता था. उस पर 1948 में हैदराबाद राज्य के भारत में विलय के बाद भारत सरकार ने प्रतिबन्ध लगा दिया था, और दूसरा भाग जो 1957 में इस पार्टी की बहाली के बाद शुरू हुआ जब उस ने अपने नाम में ऑल इंडिया जोड़ा और साथ ही अपने संविधान को बदला. कासिम राजवी ने, जो हैदराबाद राज्य के विरुद्ध भारत सरकार की कारवाई के समय मजलिस के अध्यक्ष थे और गिरफ्तार कर लिए गए थे, पाकिस्तान चले जाने से पहले इस पार्टी की बागडोर उस समय के एक मशहूर वकील अब्दुल वहाद ओवैसी के हवाले कर गए थे। उसके बाद से यह पार्टी इसी परिवार के हाथ में रही है! अब्दुल वाहेद के बाद सलाहुद्दीन ओवैसी उसके अध्यक्ष बने और अब उनके पुत्र असदुद्दीन ओवैसी उस के अध्यक्ष और सांसद हैं जब उनके छोटे भाई अकबरुद्दीन ओवैसी विधान सभा में पार्टी के नेता हैं। असदुद्दीन ओवैसी, मजलिस के अध्यक्ष और हैदराबाद के सांसद हैं।

इस परिवार और मजलिस के नेताओं पर यह आरोप लगते रहे हैं की वो अपने भड़काऊ भाषणों से हैदराबाद में साम्प्रदायिक तनाव को बढ़ावा देते रहे हैं। लेकिन दूसरी और मजलिस के समर्थक उसे भारतीय जनता पार्टी और दूसरे हिन्दू संगठनों का जवाब देने वाली शक्ति के रूप में देखते हैं। राजनैतिक शक्ति के साथ साथ ओवैसी परिवार के साधन और संपत्ति में भी जबरदस्त वृद्धि हुई है जिसमें एक मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज, कई दूसरे कालेज और दो अस्पताल भी शामिल हैं। एइएमइएम ने अपनी पहली चुनावी जीत 1960 में दर्ज की जब की सलाहुद्दीन ओवैसी हैदराबाद नगर पालिका के लिए चुने गए और फिर दो वर्ष बाद वो विधान सभा के सदस्य बने तब से मजलिस की शक्ति लगातार बढती गई। बढ़ती हुई लोकप्रियता के साथ साथ सलाहुद्दीन ओवैसी सलार-ए-मिल्लत के नाम से मशहूर हुए. वर्ष 1984 में वो पहली बार हैदराबाद से लोक सभा के लिए चुने गए साथ ही विधान सभा में भी उस के सदस्यों की संख्या बढती गई हालाँकि कई बार इस पार्टी पर एक सांप्रदायिक दल होने के आरोप लगे लेकिन आंध्र प्रदेश की बड़ी राजनैतिक पार्टिया कांग्रेस और तेलुगुदेसम दोनों ने अलग अलग समय पर उससे गठबंधन बनाए रखा। दिलचस्प बात यह है की हैदराबाद नगरपालिका में यह गठबंधन अभी भी जारी है और कांग्रेस के समर्थन से ही मजलिस को मेयर का पद मिला है। 2009 के चुनाव में एइएमइएम ने विधान सभा की सात सीटें जीतीं जो की उसे अपने इतिहास में मिलने वाली सब से ज्यादा सीटें थीं. कांग्रेस के साथ उस की लगभग 12 वर्ष से चली आ रही दोस्ती में दो महीने पहले उस समय अचानक दरार पड़ गई जब चारमीनार के निकट एक मंदिर के निर्माण के विषय ने एक विस्फोटक मोड़ ले लिया। मजलिस ने कांग्रेस सरकार पर मुस्लिम-विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया और उस से अपना समर्थन वापस ले लिया. अकबरुद्दीन ओवैसी के तथाकथित भाषण को लेकर जो हंगामा खड़ा हुआ है और जिस तरह उन्हें गिरफ्तार करके जेल भेज गया है उसे कांग्रेस और मजलिस के टकराव के परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है। अधिकतर हैदराबाद तक सीमित मजलिस अब अपना प्रभाव आंध्र प्रदेश के दूसरे जिलों और पड़ोसी राज्यों महाराष्ट्र और कर्नाटक तक फैलाने की कोशिश कर रही है। हाल ही में उस ने महाराष्ट्र के नांदेड़ नगर पालिका में 11 सीटें जीत कर हलचल मचा दी है। आंध्र प्रदेश में कांग्रेस इस संभावना से परेशान है कि 2014 के चुनाव में एइएमइएम जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस के साथ हाथ मिला सकती है। यही कारण है की कांगेस गिरफ्तारी को लेकर इतनी देरी कर रही थी। अकबरुद्दीन ओवैसी की गिरफ्तारी के बाद तो मजलिस और कांग्रेस के बीच किसी समझौते की सम्भावना नहीं रह गई।

Sunday, January 6, 2013

भारत में छोटा पाकिस्तान और दाउद नगर शर्म या सियासत

यह बात सोलह आने सच है कि भारत में छोटा पाकिस्तान और लादेन नगर नाम की बस्तियां भी मौजूद हैं। इस बात का सबूत हैं इन इलाकों के बिजली बिल। लेकिन इस सब में यहां के लोगों का कोई दोष नहीं है। सरकारी कागजात में ही इन जगहों के नाम ऐसे रखे गए हैं। मुंबई के नाला सोपारा की झुग्गियों में बसीं दो बस्तियों को ये नाम दिए गए हैं। जब मामाला मीडिया में आया तो राज्य सरकार इसकी जांच कराने और दोषियों को दंडित करने की बात कह रही है। पुलिस ने इन बस्तियों के ये नाम दिए और सरकारी बिजली कंपनी ने उसी नाम से बिजली बिल भेजकर आधिकारिक रूप से इस नामाकरण पर मुहर लगा दी। राज्य की पावर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी यानी महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रिब्यूशन कम्पनी में इन बस्तियों को इसी नाम से जाना भी जाता है। यह मामला तब सामने आया जब आधार कार्ड के रजिस्ट्रेशन के लिए रेजिडेंस प्रूफ के तौर पर यहां के लोगों ने अपने बिजली के बिल जमा करवाए। इन बस्तियों में रहने वाले ज्यादातर लोग अल्पसंख्यक समुदाय के हैं। इलाके के लोग इस बात से आहत हैं कि उनका नाम पाकिस्तान और अल-कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन के साथ जोड़ा जा रहा है। बताया गया कि इस इलाके का असली नाम लक्ष्मी नगर है। स्थानीय लोगों ने शिकायत की है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद किसी भी सरकारी अधिकारी ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया। उनका आरोप है कि इस घपले की जानकारी महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड को थी लेकिन वहां के अधिकारियों ने इसे ऐसे ही जाने दिया। जब जांच की गई तो सामने आया कि संतोष नगर और पश्चिमी एक्सप्रेस हाइवे के बीच की इस जगह पर कुछ समय पहले यहां के लोकल बिल्डर माफिया और पुलिस के बीच काफी टेंशन चल रही थी। उसी दौरान पुलिस ने इस इलाके का नाम छोटा पाकिस्तान रख दिया और यह नाम प्रचलन में आ गया। स्थानीय कॉर्पोरेटर छाया पाटिल ने यह मुद्दा उठाया। तब यह बात डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर और राज्य बिजली विभाग के संज्ञान में लाई गई। इसी बीच राज्य अल्पसंख्यक समुदाय ने बिजली विभाग को बिलों पर हुई इस गंभीर चूक की जांच करने की ताकीद की है। राज्य के पावर मिनिस्टर अजीत पाटिल ने इस मामले में जांच के बाद ऐक्शन लेने का वादा किया है। पुलिस ने इन बस्तियों के ये नाम दिए और सरकारी बिजली कंपनी ने उसी नाम से बिजली बिल भेजकर आधिकारिक रूप से इस नामाकरण पर मुहर लगा दी। राज्य की पावर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी यानी महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रिब्यूशन कम्पनी में इन बस्तियों को इसी नाम से जाना भी जाता है। यह मामला तब सामने आया जब आधार कार्ड के रजिस्ट्रेशन के लिए रेजिडेंस प्रूफ के तौर पर यहां के लोगों ने अपने बिजली के बिल जमा करवाए। इन बस्तियों में रहने वाले ज्यादातर लोग अल्पसंख्यक समुदाय के हैं। इलाके के लोग इस बात से आहत हैं कि उनका नाम पाकिस्तान और अल-कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन के साथ जोड़ा जा रहा है। बताया गया कि इस इलाके का असली नाम लक्ष्मी नगर है। स्थानीय लोगों ने शिकायत की है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद किसी भी सरकारी अधिकारी ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया। उनका आरोप है कि इस घपले की जानकारी महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड को थी लेकिन वहां के अधिकारियों ने इसे ऐसे ही जाने दिया। जब जांच की गई तो सामने आया कि संतोष नगर और पश्चिमी एक्सप्रेस हाइवे के बीच की इस जगह पर कुछ समय पहले यहां के लोकल बिल्डर माफिया और पुलिस के बीच काफी टेंशन चल रही थी। उसी दौरान पुलिस ने इस इलाके का नाम छोटा पाकिस्तान रख दिया और यह नाम प्रचलन में आ गया। स्थानीय कॉर्पोरेटर छाया पाटिल ने यह मुद्दा उठाया। तब यह बात डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर और राज्य बिजली विभाग के संज्ञान में लाई गई। इसी बीच राज्य अल्पसंख्यक समुदाय ने बिजली विभाग को बिलों पर हुई इस गंभीर चूक की जांच करने की ताकीद की है। राज्य के पावर मिनिस्टर अजीत पाटिल ने इस मामले में जांच के बाद ऐक्शन लेने का वादा किया है।

मिया दाद को भारत में यात्रा की अनुमति देना कितना सही ?

भारत के दुश्मन दाउद इब्राहिम के समधी जावेद मियांदाद को भारत दौरे पर वीजा देने का मामला तूल पकड़ रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने मियांदाद को वीजा देने का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। वास्तव में देखा जाए तो जावेद मियांदाद शुरु से ही भारतीय टीम के सबसे बड़ा सरदर्द रहे हैं। भारत के खिलाफ खेले गए 35 वन डे मैचो में उन्होंने 51 की औसत से 1175 रन बनाए ।वन डे में उन्होंने भारत के खिलाफ 3 शतक और 6 अर्धशतक लगाए हैं। उनकी 119 रनों की सर्वश्रेष्ठ पारी भारत के खिलाफ ही रही है जो उन्होंने 77 गेंदो पर बनाई थी। हालांकि यह मैच पाकिस्तान हार गया था पर इस पारी में मियांदाद ने भारतीय गेंदबाजो की बहुत धुनाई करी थी। मियांदाद को टीम इंडिया आखिर तक आउट नहीं कर पायी थी। यही नहीं टेस्ट में तो उन्होंने टीम इंडिया की खूब मिट्टी पलीद करी है। मियांदाद ने भारत के खिलाफ खेले गए 28 मैचों में  2228 रन बनाए हैं। इससे पता चलता है कि भारतीय बॉलिंग एटैक मियांदाद को कितना भाता था। टेस्ट मैचों में भारत के खिलाफ मियांदाद ने 67 की औसत से रन बनाए हैं। इसमें 280 रनों की नाबाद पारी में उन्होंने भारतीय टीम को अपने विकेट के लिए तरसा दिया पर उन्हें विकेट नहीं मिला। उन्होंने भारत के खिलाफ 14 अर्धशतक और पांच शतक बनाए हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच  1986 में शारजाह में खेले गए ऑस्ट्रेलिया कप के फाइनल को शायद ही कोई भारतीय फैन भुला पाएगा। इस मैच में पाकिस्तान कहीं से कहीं तक मैच जीतने की स्थिती में नहीं था। पहले बल्लेबाजी करते हूए भारत ने सुनील गावस्कर की 92 रनों की पारी की बदौलत भारतीय टीम ने 7 विकेट के नुकसान पर 245 रनों का लक्ष्य रखा। जवाब में पाकिस्तान की टीम लगातार अंतराल पर विकेट गंवाती रही। अंतिम 10 ओवर में पाकिस्तान को जीतने के लिए 90 रन चाहिए थे। वहीं आखिरी ओवर में पाकिस्तान को 11 रनों की दरकार थी। इस ओवर ने भारत और पाकिस्तान क्रिकेट की सूरत ही बदल कर रख डाली। आखिरी बॉल पर पाकिस्तान को जीतने के लिए चार रन चाहिए थे। चेतन शर्मा की एक फुल टॉस गेंद को मियांदाद ने सीमा रेखा पार करवा दिया। मैच के साथ ही पाकिस्तान ने ऑस्ट्रेलिया कप भी जीत लिया। इस जीत के बाद मियांदाद पाकिस्तान के लिए नेशनल हीरो बन गए। लगभग एक दशक तक पाकिस्तान क्रिकेट का भारतीय क्रिकेट का दबदबा रहा। मियांदाद की भारतीय क्रिकेट टीम से मैदान पर काफी नोक झोंक भी हुई है। 1992 में किरन मोरे और मियांदाद के बीच हुई कहा सुनी को कौन भूल सकता है। पाकिस्तान की पारी के दौरान किरन मोरे की अपील से जावेद मियांदाद काफी चिढ़ गए। उन्होंने गेंदबाज को बीच में ही रोककर मोरे से बार बार अपील बंद करने को कहा। मोरे और मियांदाद की कहा सुनी के बाद मैच वापस शुरु हो गया। कुछ गेंदो बाद मियांदाद ने रन लेकर किरन मोरे की तरह कूद कर बताया। मियांदाद के इस मखौल की चर्चा काफी मशुहूर हूई। जावेद मियांदाद ने भारत को क्रिकेट छोड़ने के बाद भी नहीं बक्शा।  कोच बनकर उन्होंने हर भारतीय खिलाड़ी के विरुद्ध खास रणनीति बनायी। उस वक्त कप्तान वसीम अकरम की अगुवाई में पाक टीम ने भारत में एशियन टेस्ट चैंपयिनशिप जीती और भारत को वन डे सीरीज भी हराई। पाकिस्तानी टीम की सफलता में मियांदाद का एक बड़ा हाथ था। जावेद मियांदाद के दो लड़को के पिता है। उनके बेटे जुनैद खान की शादी माहरुख इब्राहिम के साथ हुई। माहरुख इब्राहिम, दाउद इब्राहिम की बेटी है जो एक अंडर वर्लड डॉन है। दाउद इब्राहिम 1992 के मुम्बई में हुए बम विस्फोट का मुख्य आरोपी है। विदेश मंत्री खुर्शीद ने मियांदाद को वीजा देने के फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि ये फैसला गृह मंत्रालय का है। सुरक्षा एजेंसियों से राय-मश्विरा के बाद ही वीजा देने का फैसला लिया गया। जबकि कांग्रेस के भीतर ही इस मसले पर विरोध के स्वर उठने लगे हैं। जावेद मियांदाद को भारत-पाकिस्तान वनडे मैच देखने के लिए वीजा दिए जाने पर कांग्रेस नेता जगदंबिका पाल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। जगदंबिका पाल के मुताबिक जावेद मियांदाद मोस्ट वांटेड आतंकी दाऊद इब्राहिम के समधी हैं और दाऊद के समधी जावेद मियांदाद को भारत का वीजा देना उचित नहीं है। पहले से ही पाकिस्तानी टीम के दौरे का विरोध कर रही शिवसेना ने कहा है कि मियांदाद को वीजा देना दाऊद को वीजा देना जैसा है। शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा है कि इस मुद्दे पर देश के सभी लोगों को एकजुट होकर इसका विरोध करना चाहिए। उन्होंने जावेद मियांदाद को वीजा देने का कड़ा विरोध किया है। उनके मुताबिक मियांदाद को वीजा देना दाऊद को वीजा देने जैसा है। उधर बीजेपी नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने वीजा के फैसले पर सीधी राय जाहिर करने की जगह सुरक्षा एजेंसियों को कठघरे में खड़ा किया है। नकवी का कहना है कि सुरक्षा एजेंसियों को मालूम होना चाहिए कि कौन भारत आ रहा है, जबकि बीजेपी नेता कीर्ति आजाद ने भी कहा कि मियांदाद को वीजा देना ठीक नहीं है।

Friday, January 4, 2013

क्या अकबरुदीन ओवैसी को देशद्रोही घोषित करना चाहिए

हैदराबाद के अदिलाबाद में एक समुदाय के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के आरोपी विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने धारा 153ए के तहत मामला दर्ज किया है। फिलहाल ओवैसी लंदन में हैं। मेट्रोपोलियन मजिस्ट्रेट ने तमाम सबूत देखने के बाद उस्मानिया यूनिवर्सिटी पुलिस स्टेशन को ओवैसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। ओवैसी ने 24 दिसंबर 2012 को अदिलाबाद में भड़काऊ भाषण दिया था। हिन्दुस्तान और हिन्दुओं के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने वाले मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन के विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी लंदन चले गये है. ओवैसी के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर गुरुवार को एक और एफआईआर दर्ज की गई है। एफआईआर की भनक मिलने के बाद अकबरुद्दीन ओवैसी के लंदन जाने की खबर है। गौरतलब है कि हैदराबाद के सांसद असादुद्दीन ओवैसी के छोटे भाई और चंद्रायनगट्टा इलाके से विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी कट्टरपंथी माने जाते हैं। 24 दिसंबर को उन्होंने एक सार्वजनिक भाषण में जम कर भारत के खिलाफ आग उगला। हिन्दुओं और भारत वासियों को ललकारते हुये ओवैसी ने कहा कि अरे हिन्दुस्तान, हम पच्चीस करोड़ हैं न तुम सौ करोड़ हो ना ..ठीक है .. 15 मिनट को पुलिस हटा लो बता देंगे किसमें हिम्मत है और कौन ताकतवर है। ओवैसी ने मुंबई धमाकों को भी जायज ठहराया और कहा कि ऐ हिन्दुस्तान, यदि मुसलमानों पर जुल्म नहीं होते तो मुंबई में धमाके नहीं होते। ओवैसी वहीं नहीं रुके उन्होंने अजमल कसाब की भी तरफदारी की उन्होंने कहा कि उस बच्चे अजमल कसाब को फांसी पर लटका दिया गया, ठीक है, उसने दो सौ बेकसूर लोगों की जान ली थी, लेकिन गुजरात में दो हजार मुसलमानों की हत्या के गुनहगार नरेंद्र मोदी को फांसी क्यों नहीं दी? पाकिस्तानी को हिंदुस्तानी को मारने पर फांसी दे दिया। हिंदुस्तानी है तो हिंदुस्तानी को मारने पर देश की गद्दी अगर देश में इंसाफ है तो कसाब की तरह मोदी को भी ऐसी सजा दी जाए। ओवैसी ने कहा कि मोदी हैदराबाद आकर दिखाएं उनको बता देंगे। ओवैसी के इन भाषणों के बाद उनके खिलाफ अदालत में याचिका दायर की गई थी, जिस पर अदालत ने एक और एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। दालत में सुनवाई के दौरान बुधवार को करुणासागर ने कहा कि उन्हें शिकायत दाखिल करने के बाद से धमकीभरे फोन कॉल आ रहे हैं। उन्होंने इस संबंध में सरूरनगर थाने में दर्ज प्राथमिकी की प्रति भी अदालत में जमा की। उधर, आंध्र प्रदेश के सीएम ने कहा कि भड़काऊ भाषण बड़ा मुद्दा नहीं है। इस बारे में मुझसे नहीं पुलिस से पूछें। ऐसे मामलों में सरकार दखल नहीं देती। हम सेकुलर पार्टी हैं और अल्पसंख्यकों और दूसरों के साथ एक समान व्यवहार करती है। अकबरुद्दीन ओवैसी इत्तेहादुल ए मजलिस मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के भाई हैं। इससे पहले भी अकबरुद्दीन विवादों में रह चुके हैं। उन्होंने अपने समर्थकों के साथ बांग्लादेशी तस्लीम नसरीन के साथ मारपीट भी की थी। सामाजिक कार्यकर्ता शबनम हाशमी ने निर्मल टाउन में 24 दिसम्बर को दिए गए ओवैशी के भाषण की ओर ध्यान दिलाते हुए पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। हाशमी ने अपनी शिकायत में कहा है कि ओवैशी का भाषण पूरी तरह आपत्तिजनक, भड़काऊ और देश की सांस्कृतिक विरासत के खिलाफ है। यह देश के संविधान, लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों के खिलाफ है। ऐसे भाषणों से समाज में बंटवारा होने, शांति भंग होने और समुदायों के बीच दंगे होने की आशंका है। विश्व हिंदू परिषद एवं बजरंग ने आंध्र प्रदेश के विधायक अकबरूद्दीन औवेसी द्वारा गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की तुलना आतंकी अजमल कसाब से करने की निंदा की है। बजरंग दल एवं विश्व हिंदू परिषद ने विधायक पर देशद्रोह का आरोप लगाते हुए राष्ट्रपति से कार्यवाही करने की मांग की है, ताकि आतंकवादियों को सबक मिल सके।